पैनासॉनिक की सफलता की कहानी


दोस्तों, आज हम आपको एक ऐसे गरीब बच्चे की कहानी बताएंगे, जो अपने दम पर अरबों रुपये की कंपनी खड़ी की। जिनका नाम कोनोसुके मात्सुशिता है। इनका जन्म सन् 1894 में हुआ था। लगभग 126 साल पहले जापान के एक छोटे से गांव में किसान के घर में कोनोसुके का जन्म हुआ था।


KONOSUKE MATSUSHITA

जब कोनोसुके 9 वर्ष के हुए थे, तब उनके पिता को परेशानियों की वजह से अपनी सभी जमीनें बेचनी पडीं और फिर कोनोसुके को घर छोडना पड़ा। गांव में सब कुछ गंवा चुके थे। कोनोसुके के पिता और अपने परिवार सहित शहर आ गए और अपने घर का गुजारा करने के लिए छोटे-मोटे काम करने लगे। अपने परिवार की मदद के लिए 9 वर्ष के कोनोसुके को अपनी पढाई छोड़नी पड़ी और एक दुकान में काम करना शुरु कर दिया। कोनसुके सूरज की पहली किरण के साथ उठते, दुकान की साफ-सफाई करते और अपने मालिक के बच्चे की देखभाल में लग जाया करते थे।

15  वर्ष की उम्र तक साइकिल की दुकान में काम कियाः

कुछ महीनों के बाद दुकान की स्थिती ठीक नहीं थी, तो कोनोसुके को दुकान के मालिक ने निकाल दिया। उसके बाद उन्होंने एक साइकिल की दुकान पर काम किया। साइकिल की दुकान में कोनसुके को बहुत कुछ सीखने को मिलता था। इसी दुकान पर मेटल का भी काम होता था। इस दुकान पर कोनोसुके ने लगभग 5 वर्ष काम किया।

20 वर्ष उम्र में विवाह हो गयाः

कोनोसुके अपनी जिन्दगी में कुछ बड़ा करना चाहते थे, कोनोसुके ने नोटिस किया कि दुनिया में बिजली की मांग बहुत ज्यादा होने वाली है, तो कोनोसुके ने बिजली के क्षेत्र में नौकरी ढूँढ़ने लगे। एक दिन उन्हें ओसाका इलेक्ट्रिक लाइट कंपनी का विज्ञापन दिखा, कंपनी में नए लोगों की जरुरत थी। इस कंपनी में कोनोसुके को नौकरी मिल गई। इस कंपनी में भी कोनोसुके को बहुत कुछ सीखने को मिला। कोनोसुके बिजली के क्षेत्र में कुछ बड़ा करने की सोच रहे थे, इसलिए वह जब भी फ्री होते थे, वह किताबे पढ़ते रहते थे और बहुत से छोटे-मोटे एक्सपेरिमेंट भी करते थे। कोनोसुके की बहन ने 20 बर्ष की उम्र में इनका परिचय अपनी दोस्त मुमेनों से करवाया और कुछ महीनों के बाद कोनोसुके का विवाह हो गया। विवाह हो जाने के बाद इनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई।

कोनोसुके बने टेक्निकल इंस्पेक्टरः

कोनोसुके जिस कंपनी में नौकरी कर रहे थे, 22 वर्ष की उम्र में उस कंपनी के टेक्निकल इंस्पेक्टर बन गये थे, जो कि उस समय में एक बहुत ऊँचा पोस्ट है। इसी समय उन्होंने खाली समय का उपयोग करते समय एक नया इलेक्ट्रिकल सॉकेट बनाया था और उस सॉकेट को अपने बॉस को दिखाया लेकिन कोनोसुके के बॉस ने उस सॉकेट को रिजेक्ट कर दिया क्योंकि कोनोसुके के बॉस ने कहां कि ये मार्केट में नहीं चलेगा। लेकिन कोनोसुके को अपने आप पर पूरा भरोसा था कि यह मार्केट में जरुर चलेगा। इसी विश्वास के दम पर कोनोसुके ने नौकरी छोड़ दी और खुद का काम करने की ठान ली। कोनोसुके के दोस्तों ने भी कहा कि तुम कामियाब नहीं हो पाओगे, इसलिए इसी नौकरी को ही करते रहो। लेकिन कोनोसुके को पूरा विश्वास था, कुछ बड़ा करने का ज्जबा था, हौसला था इसलिए कोनोसुके पीछे नहीं हटने वाले थे।

पैसे ना होने पर घर का सामान बेचना पड़ाः

कोनोसुके ने वह नौकरी छोड़ दी और उनके पास कुछ पैसे थे, जिससे उन्होंने कुछ बेसिक टूल्स खरीद लिए। कोनोसुके ने अपनी एक टीम बनाई जिसमें कोनोसुके की पत्नी, भाई और दो को-वर्कर्स के साथ घर पर ही काम की शुरुआत की और सॉकेट बनाने लगे और कोनोसुके खुद मार्केट में जाकर सॉकेट को बेचने की कोशिश करते लेकिन रिजेक्ट कर दिया जाता था। समय निकलता गया उनके बनाये हुए सॉकेट को कोई खरीद नहीं रहा था। कुछ महीनों के बाद छोटे ऑर्डर मिले जिससे गुजारा नहीं हो रहा था। धीरे-धीरे हालात इतने खराब हो गए थे कि को-वर्कर्स ने उनका साथ छोड़ दिया और उनकी टीम में तीन ही लोग बचे थे। कोनोसुके की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि घर चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ा और घर का सामान भी बेचना पड़ा। कोनोसुके ने फिर भी हार नहीं मानी। रोज एक नई कोशिश करते और असफल हो जाते। कोनोसुके को एक दिन अचानक उन्हीं की कंपनी का एक हजार पीसेस का ऑर्डर मिला तब से उनके बिजनेस ने रफ्तार पकड़ ली। कोनोसुके की इस कंपनी में आज के समय में लगभग 250000 से भी ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं और इस कंपनी का सालाना टर्न ओवर लगभग 70 बिलियन डॉलर्स है और इस कंपनी का नाम है, पैनासॉनिक। कोनोसुके को जापान में इन्हें द गॉड़ ऑफ मैनेजमेंट के नाम से जाना जाता है।

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